| at 6:09 AM
न जाने क्यों मेरे साथ ये फ़साना हुआ
तू समां हुई और मैं परवाना हुआ
खुदा के बाद नाम तेरा ही लेता है रूमी
तेरे इश्क मैं इस कदर दीवाना हुआ
तू समां हुई और मैं परवाना हुआ
खुदा के बाद नाम तेरा ही लेता है रूमी
तेरे इश्क मैं इस कदर दीवाना हुआ
| at 11:37 AM
अब और गम के आंसू हम पीना नही चाहते,
खोया है बहुत कुछ तुम्हे हम खोना नही चाहते,
हमारे हाले बेबस से तो तुम वाकिफ हो ऐ दोस्त,
हम यह दोहरी जिंदगी अब जीना नही चाहते!हमारे हाले बेबस से तो तुम वाकिफ हो ऐ दोस्त,
जिंदगी
| at 7:15 PM
जिंदगी से अंत में हम उतना ही पाते हैं
जितना उसमे मेहनत की पूँजी लगते हैं!
पूँजी लगना संकट का सामना करना है
उसके हर इक पन्ने को उलट कर पढ़ना है
जिंदगी में गर हम आप ही आप रहे तो क्या रहे
फ़क़त खुशियों के लहरों में बहे तो क्या बहे
जिंदगी में है "रूमी" कभी खुसी तो कभी गम
जीना उसे आया जो किसी खुशी को न समझे कम !
पान (कुण्डलिया)
| at 8:11 PM
मेरे द्वारा रचित
प्रविष्टियाँ पढ़ें

पान मान के खाइए, भले न चूना-खैर
दिल से दिल मिलाइए, हो न किसी से बैरहो न किसी से बैर,मिलकर रहें सब एक
सत्य-पथ पर चलकर काम करें कोई नेक
"रूमी" की है फरियाद, पाना है गर सम्मान
ऐसी वाणी बोलिए की दुश्मन खिलावे पान !
मनहर (सवैया)
| at 7:50 PM
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