अब और गम के आंसू हम पीना नही चाहते,

खोया है बहुत कुछ तुम्हे हम खोना नही चाहते,
हमारे हाले बेबस से तो तुम वाकिफ हो ऐ दोस्त,
हम यह दोहरी जिंदगी अब जीना नही चाहते!

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जिंदगी

जिंदगी से अंत में हम उतना ही पाते हैं
जितना उसमे मेहनत की पूँजी लगते हैं!

पूँजी लगना संकट का सामना करना है
उसके हर इक पन्ने को उलट कर पढ़ना है

जिंदगी में गर हम आप ही आप रहे तो क्या रहे
फ़क़त खुशियों के लहरों में बहे तो क्या बहे

जिंदगी में है "रूमी" कभी खुसी तो कभी गम
जीना उसे आया जो किसी खुशी को न समझे कम !

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देखा है !

हमने गिरते हुओं को सँभालते देखा है,

संभाले हुए लोगों को फिसलते देखा है,

जिंदगी में आप कभी हिम्मत न हारना "रूमी"

हमने काँटों के बीच ही गुल खिलते देखा है!

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पान (कुण्डलिया)

मेरे द्वारा रचित
प्रविष्टियाँ पढ़ें





पान मान के खाइए, भले चूना-खैर
दिल से दिल मिलाइए, हो किसी से बैरहो किसी से बैर,मिलकर रहें सब एक
सत्य-पथ पर चलकर काम करें कोई नेक
"
रूमी" की है फरियाद, पाना है गर सम्मान
ऐसी वाणी बोलिए की दुश्मन खिलावे पान !

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मनहर (सवैया)


उठो, जागो ए भारत माता के वीर जवानों,
दुश्मन को हमें ही सबक सिखाना होगा
धर्म के नाम पर लड़ाने वालों को अब तो
अपनी एकता का अर्थ समझाना होगा
अब भी गर हम चुप-चाप बैठे रहे तो
धर्म-स्थल ही क्या,पूरा देश निशाना होगा
इक-दो आतंकवादियों से कुछ न होगा "रूमी"
आतंकवाद को ही जड़ से मिटाना होगा!

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खेल !

जाने लोग कैसा-कैसा खेल खेलते हैं
पल भर में कैसा गिरगिट सा रंग बदलते हैं
आप हर इक कदम फूँक-फूँक कर रखना "रूमी"
यहाँ
अपने सिखाये ही अपने पर चाल चलते हैं!!

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nari


नारी समपूर्ण संसार की शक्ति है
इसके इज्जत में ही सच्ची भक्ति है




यही पत्नी,पुत्री,बहन,और माता है
इसका समस्त मानव जाती से नाता है


नर में कर्तव्य भावना जगती है
लालच-कपट को कोशो दूर भगाती  है

इसका पूरा हृदय ममता से भरा है
कोई नही संसार में इससे खरा है

 
इसके संतोष की नही कोई सीमा
इसके तेज के आगे पड़ता रवि धीमा


वास्तव में "रूमी" नारी सृष्टि का रूप है
यह तो भगवन का ही दूसरा स्वरुप है!

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