जिंदगी
| at 7:15 PM
जिंदगी से अंत में हम उतना ही पाते हैं
जितना उसमे मेहनत की पूँजी लगते हैं!
पूँजी लगना संकट का सामना करना है
उसके हर इक पन्ने को उलट कर पढ़ना है
जिंदगी में गर हम आप ही आप रहे तो क्या रहे
फ़क़त खुशियों के लहरों में बहे तो क्या बहे
जिंदगी में है "रूमी" कभी खुसी तो कभी गम
जीना उसे आया जो किसी खुशी को न समझे कम !
पान (कुण्डलिया)
| at 8:11 PM
मेरे द्वारा रचित
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पान मान के खाइए, भले न चूना-खैर
दिल से दिल मिलाइए, हो न किसी से बैरहो न किसी से बैर,मिलकर रहें सब एक
सत्य-पथ पर चलकर काम करें कोई नेक
"रूमी" की है फरियाद, पाना है गर सम्मान
ऐसी वाणी बोलिए की दुश्मन खिलावे पान !
मनहर (सवैया)
| at 7:50 PM
nari
| at 4:35 AM
नारी समपूर्ण संसार की शक्ति है
इसके इज्जत में ही सच्ची भक्ति है
यही पत्नी,पुत्री,बहन,और माता है
इसका समस्त मानव जाती से नाता है
नर में कर्तव्य भावना जगती है
लालच-कपट को कोशो दूर भगाती है
इसका पूरा हृदय ममता से भरा है
कोई नही संसार में इससे खरा है
इसके संतोष की नही कोई सीमा
इसके तेज के आगे पड़ता रवि धीमा
वास्तव में "रूमी" नारी सृष्टि का रूप है
यह तो भगवन का ही दूसरा स्वरुप है!
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